UPI Transaction Reward: भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है यूपीआई (UPI)। छोटे से बड़े शहरों तक अब लोग सामान खरीदने से लेकर टैक्सी तक के किराए का भुगतान यूपीआई से कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में यूपीआई ट्रांजैक्शन में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है।
आरबीआई और एनपीसीआई (NPCI) के आंकड़े बताते हैं कि देश में हर महीने करोड़ों की संख्या में यूपीआई ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। हालांकि अभी भी भारत के कई हिस्सों में छोटे दुकानदार और ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। इसी वजह से सरकार ने यूपीआई ट्रांजैक्शन को और बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।
1500 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 1500 करोड़ रुपये की इंसेंटिव स्कीम को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत सरकार छोटे दुकानदारों के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर उन्हें आर्थिक लाभ देगी।
सरकार का उद्देश्य है कि 2000 रुपये से कम के यूपीआई लेनदेन (UPI P2M – Person to Merchant) को बढ़ाया जाए ताकि छोटे व्यापारी और ग्राहक दोनों डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ें।
यूपीआई ट्रांजैक्शन पर सरकार देगी इंसेंटिव
सरकार की इस नई स्कीम के तहत छोटे दुकानदारों को 2000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर इंसेंटिव मिलेगा। यानी जब भी कोई ग्राहक किसी दुकानदार को 2000 रुपये से कम की राशि यूपीआई से भुगतान करेगा तो उस पर सरकार की ओर से दुकानदार को सीधे लाभ मिलेगा।
इससे छोटे व्यापारी यूपीआई को तेजी से अपनाएंगे और कैश की बजाय डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा।
प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर मिलेगा 0.15 प्रतिशत का इंसेंटिव
सरकार ने साफ किया है कि यह इंसेंटिव सिर्फ छोटे व्यापारियों के P2M यानी पर्सन टू मर्चेंट लेनदेन पर लागू होगा। इसके तहत हर यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.15 प्रतिशत का इंसेंटिव मिलेगा।
इसका मतलब अगर कोई दुकानदार यूपीआई से 1000 रुपये प्राप्त करता है तो उसे 1.5 रुपये का इंसेंटिव सरकार देगी। इसी तरह यदि दुकानदार को 1500 रुपये का पेमेंट मिला तो उसे 2.25 रुपये का सीधा लाभ होगा।
यह स्कीम सिर्फ 2000 रुपये से कम के यूपीआई पेमेंट्स पर ही लागू रहेगी।
कब से लागू होगी योजना?
सरकार ने इस योजना को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए लागू करने का फैसला लिया है।
- यह योजना 1 अप्रैल 2024 से शुरू होकर 31 मार्च 2025 तक असरदार रहेगी।
- कुल 1500 करोड़ रुपये का बजट इस योजना के लिए रखा गया है।
- योजना का लाभ देशभर में छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को मिलेगा।
मर्चेंट यूपीआई अकाउंट होगा जरूरी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस इंसेंटिव का लाभ उठाने के लिए दुकानदारों को मर्चेंट यूपीआई अकाउंट रखना जरूरी होगा।
सामान्य पर्सनल यूपीआई अकाउंट पर इस स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा। इसलिए छोटे दुकानदारों को अपने बैंक या यूपीआई सर्विस प्रोवाइडर से मर्चेंट अकाउंट खोलवाना होगा।
योजना से क्या होगा फायदा?
- छोटे दुकानदारों को मिलेगा सीधा लाभ: हर लेनदेन पर उन्हें अतिरिक्त पैसा मिलेगा जिससे वे डिजिटल पेमेंट को अधिक अपनाएंगे।
- ग्राहकों को मिलेगा बेहतर अनुभव: दुकानदार कैश की जगह यूपीआई से पेमेंट लेना पसंद करेंगे जिससे ग्राहकों के लिए भी भुगतान करना आसान होगा।
- कैशलेस इकॉनॉमी को बढ़ावा: सरकार का लक्ष्य भारत को ज्यादा से ज्यादा कैशलेस इकोनॉमी की ओर ले जाना है, जिसमें यह योजना सहायक होगी।
- असंगठित क्षेत्र में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा: गांवों और छोटे कस्बों में भी छोटे व्यापारी अब यूपीआई पेमेंट को प्रोत्साहित करेंगे।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
सरकार का मानना है कि भारत में यूपीआई पेमेंट सिस्टम अब ग्लोबल लेवल पर भी पहचान बना चुका है। कई देशों में भारतीय यूपीआई सिस्टम को लागू करने पर चर्चा चल रही है।
ऐसे में भारत में यूपीआई का दायरा और व्यापक करने के लिए सरकार छोटे लेनदेन पर इंसेंटिव देकर छोटे व्यापारियों को डिजिटल इकोनॉमी से जोड़ना चाहती है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों पर खास फोकस
सरकार इस योजना के जरिए स्पेसली ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के दुकानदारों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए मोटीवैट करना चाहती है।
शहरों में तो यूपीआई का इस्तेमाल आम हो गया है, लेकिन छोटे गांवों और कस्बों में अभी भी नकद लेनदेन का ही बोलबाला है। यह स्कीम उन क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने में मददगार साबित होगी।